क्यों है कुमाऊं में वसंत पंचमी का खास महत्व !
अपनी समृद्ध संस्कृति, वैभवशाली परम्पराओं, अभूतपूर्व प्राकृतिक सौंदर्य के लिए उत्तराखंड देश में ही नहीं अपितु समस्त वि में प्रसिद्ध है। यहां के तीज त्योहारों में भी प्रकृति प्रेम और सद्भाव की भावना झलकती है। बसंत पंचमी का त्यौहार उत्तराखंड में प्रकृति प्रेम और आपसी सद्भाव के रूप में मनाया जाता है। बसंत पंचमी फूलों के खिलने और नई फसल के आने का भी त्योहार है। इस दिन दान और स्नान का विशेष महत्त्व है। स्थानीय नागरिक अपनी पवित्र नदियों में स्नान या अपने आसपास के प्राकृतिक जल श्रोतों में स्नान करने जाते हैं। फिर गाय के गोबर से घर की लिपाई पोताई कर, घर के मुख्य दरवाजे में सरसों के पीले फूल डालें जाते हैं। कुमाऊं में बसंत पंचमी के त्यौहार को ‘जौ त्यार’ के नाम से भी जाना जाता है। जौ इस समय नई फसल होती है इसलिए घर के दरवाजों के किनारों पर भी जौ की पत्तियां लगाई जाती हैं। जौ को सुख और समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है। इसलिए इसे देवताओं से लेकर घर में सभी सदस्यों के सिरों में भी इन्हें शुभाशीष के तौर पर रखा जाता है। इस दिन घर में खास पकवान भी बनाये जाते हैं। इस वर्ष बसंत पंचमी ...