खतड़वा : कुमाऊँ की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपरा और पशुधन संरक्षण का लोकपर्व देवभूमि उत्तराखंड केवल अपनी हिमालयी सुंदरता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी हजारों वर्षों पुरानी लोकपरंपराओं, आस्था, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत के लिए भी विशेष पहचान रखता है। यहां का प्रत्येक पर्व और उत्सव प्रकृति, देवत्व, सामाजिक जीवन और लोकविश्वासों से गहराई से जुड़ा हुआ है। इन्हीं समृद्ध परंपराओं में कुमाऊँ का एक विशिष्ट लोकपर्व है- खतड़वा । कुमाऊँ : इतिहास, संस्कृति और लोकजीवन की धरती कुमाऊँ का इतिहास प्राचीन कूर्मांचल से जुड़ा माना जाता है। सदियों से यह क्षेत्र विभिन्न राजवंशों, स्थानीय राजाओं और सामंतों के शासन तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान का केंद्र रहा है। विशेष रूप से चंद राजवंश ने कुमाऊँ के इतिहास, प्रशासन, मंदिर स्थापत्य, कला और संस्कृति को गहरी पहचान दी। चंद शासकों की राजधानी चंपावत से आगे चलकर अल्मोड़ा बनी, जो लंबे समय तक कुमाऊँ की राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रही। कुमाऊँ की पहचान उसके मंदिरों, लोकदेवताओं, लोकगीतों, झोड़ा-चांचरी , छोलिया नृत्य, पारंपरिक वेशभूषा, ख...
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